■ शरादीय नवरात्र को लेकर माँ मदनपुर देवी स्थान पर उमड़ रहा आस्था का सैलाब

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■जंगल के बीच गुलजार है माँ मदनपुर देवी का जयकारे ।  
■माता की दर्शन कर श्रद्धालुओं की मन्नते होती है पूर्ण 

प्रकाश राज  / मदनपुर  / पश्चिम चम्पारण :- बिहार व उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित बाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में के  बीच मां मदनपुर देवी का एक प्रसिद्ध मन्दिर है। नवरात्र में यूपी बिहार सहित नेपाल देश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर कर देवी माता का दर्शन करते हुए मन्नते मांगते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार से आज तक कोई भक्त निराश नहीं लौटा है। यही कारण है कि नवरात्र ही नहीं बल्कि हमेशा मां के दरबार में श्रद्धालुओं का आना जाना रहता है।

मंदिर के पुजारी के सौजन्य से सभी श्रद्धालुओं के प्रसाद का मां के चरणों में अर्पित कर उन्हें आगे कर दिया जा रहा था। मां के दर्शन के बाद मंदिर से निकलने के बाद परिक्रमा कर रहे थे। इसके बाद मंदिर के बाहर स्थापित पत्थर पर नारियल फोड़ कर वहां उपस्थित पंडितों से अपने हाथ में रक्षासूत्र बंधवा रहे थे।

बताते चलें कि बिहार का मदनपुर वन क्षेत्र पड़ता है। इसी मदनपुर जंगल के घनघोर जंगलों के बीच मां मदनपुर देवी का स्थान है। मन्दिर के महंत ललन दास  के मुताबिक मां मदनपुर देवी स्थान कभी राजा मदन सिंह के राज्य के अधीन आता था। जहां राजा कभी कभार इस जंगल में शिकार करने आया करते थे। इसी दौरान राजा को सूचना मिली की रहसू गुरु नामक साधु उनके रियासत के जंगलों के बीच बाघ के गले में सांप बांधकर धान की मड़ाई करता है। यह सुन राजा सैनिकों के साथ मौके पर पहुंच गये और वह दृश्य अपनी आखों से देख अचम्भित हो गये।

उसके बाद राजा ने रहसू गुरु से इस रहस्य की जानकारी लेते हुए देवी मां को सामने बुलाने की जिद पर अड़ गये। इस पर रहसू गुरु ने राजपाठ का सर्वनाश होने की बात कहते हुए राजा को समझाने का काफी प्रयास किया लेकिन राजा उसे सजा देने की बात कहते हुए अपनी बातों पर अटल रहे। तब थक हार कर रहसू ने देवी का आह्वावन किया जिस पर देवी कामाख्या से चलकर खन्हवार में विश्राम करती हुई थावें पहुंची। देवी के थावें पहुंचने के बाद  रहसू ने एक बार राजा को फिर चेताया लेकिन राजा नहीं माने। इसी दौरान देवी मां भक्त रहसू का सिर फाड़ते हुए हाथ का कंगन दिखाया, जिसे देख राजा मूर्छित होकर जमीन पर गिर पडे़ और फिर नहीं उठे। इसके बाद राजा का परिवार व सारा साम्राज ही तहस नहस हो गया।
देवी मां की प्रकोप से बचते हुए राजा की गर्भवती बहू बिहार के बड़गांव स्टेट पहुंची तो देवी मां बहू का विनाश करने लिए उसके पीछे लहुआर होते हुए बडगांव पहुंची। जहां बहू को गर्भवती देख देवी मां उसे माफ करते हुए मदनपुर जंगल के बीचो बीच पिण्डी का रुप धारण कर स्थापित हो गयीं। इसी दौरान जंगल में गाय चराने गये हरिचरण नामक व्यक्ति की नजर पिण्डी पर पड़ी। उसने देखा कि एक गाय पिण्डी के स्वरुप पर अपना दूध गिरा रही है। यह देख हरिचरण पिण्डी के आसपास की सफाई कर वहां पूजा करना शुरु कर दिया। हरिचरण की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां प्रकट होते हुए उसकी रखवाली के लिए एक बाघ प्रदान किया। इसके बाद इसकी चर्चा क्षेत्र में चारो तरफ फैल गयी। इसकी जानकारी बडगांव स्टेट को हुई तो उन्होंने पिण्डी की जगह एक मन्दिर का निर्माण कराया। जहां दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचकर नवरात्र में पूजन अर्चन कर मन्नते मांगते हैं।

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