मुस्लिमों में एक बार में तीन तलाक की प्रथा को अपराध की श्रेणी में लाने वाला तीन तलाक विधेयक आज राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका

राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट: सदन में विपक्ष के हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही को 2 जनवरी, 2019 तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बता दें कि कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल इसे प्रवर समिति के पास भेजने के प्रयास में हैं। सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस ने व्हिप जारी करके अपने अपने सदस्यों से सोमवार को ऊपरी सदन में उपस्थित रहने को कहा था। अन्य दलों ने भी अपने सांसदों से यह विधेयक सदन में पेश करने के दौरान उपस्थित रहने को कहा था। वहीं, कई विपक्षी दलों ने सोमवार की सुबह विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के चैंबर में मुलाकात करके इस मुद्दे पर सदन की अपनी रणनीति बनाई।


दो जनवरी तक के लिए स्थगित हुई राज्यसभा
राज्यसभा में तीन तलाक बिल को लेकर हुए हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही को दो जनवरी 2019 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राज्यसभा में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने हंगामा किया, जिसके बाद सदन को दो जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।


पीएम मोदी ने भी बुलाई बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद में बैठक चल रही है। इस बैठक में पीएम के साथ बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और राजनाथ सिंह मौजूद हैं।


विपक्षी दलों ने की बैठक ससंद में राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद के चैंबर में विपक्षी दलों ने बैठक की।
कांग्रेस ने कहा- हम विरोध करेंगे 


अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) महासचिव के सी वेणुगोपाल ने शनिवार को कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि पार्टी अन्य के साथ हाथ मिलाकर विधेयक को सदन में पारित नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि 10 विपक्षी दल लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2018 के खिलाफ खुलकर सामने आये थे। वेणुगोपाल ने कहा कि यहां तक कि अन्नाद्रमुक सहित जो दल विभिन्न मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते हैं उन्होंने भी विधेयक का विरोध किया।


सरकार के पास विकल्प
राज्यसभा में सरकार के पास संख्याबल नहीं है। उसके पास दो विकल्प हैं। एक वह अन्नाद्रमुक, बीजद जैसे अपने मित्र दलों को विधेयक के लिए मना ले। अन्नाद्रमुक के 13 तथा बीजद के नौ सदस्य राज्यसभा में हैं। ये दो दल यदि सरकार के पक्ष में आ जाएं या अनुपस्थित हो जाएं तो विधेयक को पारित करना संभव हो सकता है। दूसरा विकल्प यह है कि वह विधेयक पर विपक्ष की बात मान ले और संयुक्त प्रवर समिति को भेज दे। समिति को दो-तीन सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने को कहा जा सकता है ताकि इसे सत्र के अगले चरण में पारित किया जा सके।

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